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कोरोनावायरस लाॅकडाउनः जब बच्चा डरने लगे (How to dispel child’s fears about coronavirus)

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सिर्फ वयस्क ही नहीं बल्कि बच्चे भी लाॅकडाउन की सिचुएशन का सामना कर रहे हैं। वे भी बड़ों की ही तरह इस जंग में एक योद्धा हैं और हर पल कोरोनावायरस को मात देने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। ऐसे में कभी-कभी बच्चों में हताशा-निराशा भर जाना स्वाभाविक है।

माहौल में इतना तनाव भरा है कि बच्चे समझ ही नहीं पा रहे हैं कि इस स्थिति से वे कैसे निपट सकते हैं? ऐसे में पैरेंट्स की ड्यूटी बनती है कि बच्चे को मौजूदा स्थिति से सामंजस्य बैठाना सिखाएं। इसके लिए पैरेंट्स कुछ बुनियादी चीजों को अपनी जीवनशैली में शामिल कर सकते हैं ताकि बच्चों के मन से कोरोना वायरस का डर कुछ कम हो सके।

बच्चों के लिए समय निकालें

माना कि इन दिनों पैरेंट्स पर ऑफिस और घर के काम का प्रेशर काफी ज्यादा है। इसके बावजूद आपको चाहिए कि अपने डेली रूटीन से कुछ समय बच्चों के लिए निकालें। बच्चों को समय देते वक्त कोई भी अन्य काम न करें।

इस दौरान न तो टीवी देखें और न ही उनके साथ तनावपूर्ण बातें करें। इस वक्त आप सिर्फ यह जानने की कोशिश करें कि बच्चों में आपसी मतभेद क्यों है और वे आपस में क्यों लड़ते रहते हैं। इस समस्या का समाधान खोजें।

बातचीत में ‘मैं’ शब्द का उपयोग करें

जब बच्चे आपस में लड़ते हैं तो पैरेंट्स उन्हें ‘तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था, तुमने ऐसा क्यों किया’ जैसे वाक्यों का इस्तेमाल करते हैं। हर वाक्य में पैरेंट्स ‘तुम’ करके संबोधित करते हैं जिससे यह पता चलता है कि आप उन्हें दोषी मानते हैं।

इसलिए ‘तुम’ के बजाय ‘मैं’ शब्द का उपयोग करें। आप उन्हें समझाते वक्त कहें, ‘मैं ऐसा कभी नहीं करती/करता।’ जब खुद को संबोधित करते हुए बच्चों को कुछ समझाते हैं तो उन्हें बात बेहतर समझ आती है। उनके मन का डर भी कुछ कम होगा।

फोकस रहें

यही कोई 15-20 दिन पहले बच्चों की लड़ाई की वजह अलग हुआ करती थी। लेकिन अब चारो तरफ नेगेटिव माहौल होने के कारण बच्चे नहीं समझ पा रहे हैं कि उन्हें किस तरह प्रतिक्रिया करनी है। इसलिए कोशिश करें कि आप लोगा चीजों को लेकर फोकस रहें।

बच्चों के सामने पाॅजीटिव उदाहरण रखें। आप जितना फोकस्ड रहेंगे, बच्चों के लिए चीजों को समझना उतना आसान होगा। यदि घर में नेगेटिव माहौल होगा तो बच्चों का स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है। घर में जो भी करें, सकारात्मक होकर करें। इस ओर पूरी तरह फोकस्ड रहें।

हालांकि, ऊपर बताई गई बातें, पैरेंट्स के लिए भी करना मुश्किल है। इसक बावजूद पैरेंट्स को खुद में धैर्य बनाए रखना है। बच्चों को कदम दर कदम समझाना है कि जो भी स्थित है, उसका मिलकर सामना करना है।

ध्यान रखें कि यह तय है कि आप इस स्थिति से भाग नहीं सकते और न ही अकेले इस जंग को जीत सकते हैं। इस लड़ाई में आपको अपने बच्चों का साथ चाहिए। इसलिए उन्हें बताएं कि किस तरह आपस में प्यार बनाए रखना जरूरी है तभी इस जंग को जीता जा सकता है।

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