- घरों में बंद रहना।
- ऑफिस के काम करना, घर के काम करना।
- बच्चों को संभालना।
मौजूदा समय में इन तीनों चीजों को मैनेज करना काफी मुश्किल हो गया है। बच्चों के लिए भी यह टाइम काफी मुश्किलों भरा है। वे नहीं समझ पा रहे हैं कि कब तक यूं ही उन्हें घरों में बंद रहना है। बिना स्कूल जाए, स्कूल के काम करने हैं। कब तक ये बिना खत्म होने वाली छुट्टियां खत्म होंगी।
यह स्थिति बच्चों को चिड़चिड़ा, गुस्सैल तो बना ही रही हैं। इसके साथ ही उनमें कुछ बुरी आदतें भी शामिल हो रही हैं। अगर आप चाहते हैं कि बच्चों की ये छुट्टियां बर्बाद न हों, तो उनके लिए कुछ हैप्पी मोमेंट्स क्रिएट करें। उन्हें खुश रखने की कोशिश करें।
घर के काम में शामिल करें
जब आप घर के काम प्लान करते हैं तो उसमें बच्चों को भी शामिल करें। उन्हें घर की डस्टिंग, छोटे-छोटे बर्तन धोने जैसा काम दे सकते हैं। इससे बच्चों को अहसास होगा कि वे घर का काम कर रहे हैं।
इसके अलावा इस तरह काम मैनेज करने से वे टीम वर्क करना सीख जाएंगे। रोजाना उन्हें घर के छोटे-छोटे टास्क दें। लेकिन आप इस बात का ध्यान रखें कि उनके काम में नुक्स न निकालें। इसके बजाय उन्हें बताएं कि वे अच्छे और बेहतरीन हेल्पर हैं।
छोटे-छोटे नियम बनाएं
ध्यान रखें कि जब आप बच्चों को कोई टास्क देते हैं, तो उनके लिए कुछ नियम यानी रूल्स सेट करें। इससे बच्चे अप्रत्यक्ष रूप से काफी चीजें सीख सकते हैं। लेकिन बच्चों के लिए जो भी नियम बनाएं, वे ज्यादा सख्त या कड़े नहीं होने चाहिए। जैसे आप उनके लिए टीवी देखने का टाइम सेट करें।
इसी तरह एक निश्चित समयवधि में उन्हें क्या-क्या काम करना है, ये बताएं। उन्हें सिखाएं कि टाइम पर काम कैसे पूरा किया जा सकता है। इससे बच्चे समय पर काम करना सीखेंगे। वैसे तो घर की चार दीवारी में कैद रहना, आपके और बच्चे दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण समय है।
ऐसे में यदि आप दोनों एक-दूसरे की मदद करते हैं तो इससे आपकी बाॅन्डिंग भी बेहतर होगी।
रूटीन बनाएं
बच्चों के लिए रोजाना के हिसाब से रूटीन बनाएं। इससे उनके पढ़ाई, नींद, हाॅबीज, गेम्स और घर के छोटे-मोटे कामकाज आदि सबमें बैलेंस बना रहेगा। रूटीन बनाने की वजह से आप जान पाएंगे कि आपका बच्चा पूरे दिनमें क्या करता है और क्या नहीं।
इससे एक फायदा यह भी होगा कि बच्चा पूरे दिन व्यस्त रहेगा, जिससे नकारात्मक बातें उसके जहन में नहीं आएंगी।
उन्हें खुद अपनी मदद करने दें
कई बार हर चीज आसानी से मिल जाने के कारण, बच्चों के व्यवहार में नेगेटिविटी या कहें जिद भरी जाती है। उन्हें हर चीज आसानी से न दें। उन्हें बताएं हर चीज पाने के लिए मेहनत करनी पड़ती है।
इसलिए मौजूदा स्थिति में भी उन्हें बताएं कि किसी समस्या में फंसने पर उन्हें स्वयं अपनी मदद करनी है। उदाहरण स्वरूप समझें, उन्हें अपने जूते खुद पाॅलिश करने दें, अपने कपड़ों को तह लगाने के लिए कहें, अपने रूम की खुद की सफाई करने को कहें।
उनकी हर डिमांड पूरी न करें
बेशक लाॅकडाउन का दौर है। इसमें आप चाह रहे हैं कि आपके बच्चे को किसी तरह की परेशानी न हो। इसके लिए आप हर संभव कोशिश कर रहे हैं कि बच्चे की हर चाहत पूरी हो जाए।
लेकिन ऐसी सोच आपके बच्चे को जिद्दी बना सकती है। इसलिए आप उनकी हर डिमांड पूरी न करें। वक्त चाहे जो भी हो, अपने बच्चे के प्रति थोड़ा सख्त होना चाहिए।

