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कोरोनावायरस लाॅकडाउनः पैरेंट्स की जिम्मेदारियां (Corona virus Lockdown: Parental Responsibilities)

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  • मम्मा हम घर से बाहर क्यों नहीं निकल रहे?
  • मैं अपने डोगी को लेकर पार्क टहलने क्यों नहीं जा सकती?
  • कब खत्म होगा ये लाॅकडाउन?
  • मुझे अपने दोस्तों के साथ खेलना है।

इन दिनों बच्चे अपने पैरेंट्स से इसी तरह के सवाल कर रहे हैं। लेकिन पैरेंट्स भी यह नहीं जानते कि कब कोरोनावायरस का यह कहर कब खत्म होगा और जिंदगी सामान्य पटरी पर कब लौटेगी। अगर खबरों पर यकीन करें तो लगता है कि लाॅकडाउन का यह सिलसिला फिलहाल खत्म नहीं होने वाला। ऐसे में पैरेंट्स की जिम्मेदारी और परेशानियां दोनों बढ़ जाएंगी।

लेकिन कहने वाली बात ये है कि आप अपने बच्चों के सवालों से मुंह नहीं मोड़ सकते। इसलिए कोशिश करें कि उनके हर सवाल का सही-सही जवाब दें। साथ इस बात का ध्यान रखें कि बच्चों के साथ किस तरह पेश आना है।

कैसे करें बातचीत

यह सच है कि लाॅकडाउन आपके लिए भी नई सिचुएशन है। लेकिन बच्चों को मौजूदा स्थिति के बारे में समझाना आपकी जिम्मेदारी है। यदि बच्चा आपसे पूछ रहा है कि मम्मा/पापा कोरोनावायरस क्या है? कब तक हम इस तरह घर में कैद रहेंगे? तो सवालों को गोल-मोल जवाब न दें। साथ ही आपकी बातचीत में हमेशा सकारात्मकता होनी चाहिए।

उदाहरण स्वरूप समझें यदि फिलहाल लाॅकडाउन बंद नहीं होने वाला है तो आपको कहना है, ‘कुछ दिनों की बात है। जल्दी सिचुएशन संभल जाएगी।’ पाॅजीटिव बातें हमेशा बच्चे को आशावादी बनाती हैं।

घर में न्यूज कम चलाएं

न्यूज से अपडेट रहना जरूरी है। लेकिन हर समय यदि आपके घर में न्यूज चैनल चलता रहेगा कि इससे स्थिति बिगड़ सकती है। कहने का मतलब यह कि बच्चे के मन में नेगेटिविटी घर कर सकती है। ऐसा भी हो सकता है कि आपकी बातें और टीवी न्यूज चैनल की बातों में मतभेद हो।

ऐसी स्थिति से बच्चा आप पर संदेह कर सकता है। अतः न्यूज उतना ही देखें, जितना कि अपडेट रहने के लिए जरूरी है। बच्चे के साथ अन्य मनोंरजक चीजें देखने को प्राथमिकता दें।

बच्चों की उम्र का ख्याल रखें

बातचीत के सिलसिले में अपने बच्चे की उम्र कतई न भूलें। यदि आपका बच्चा 13 साल या इससे ज्यादा उम्र का है तो आप उसके साथ कोविड 19 के संबंध में विस्तार से बातचीत कर सकते हैं।

यदि वह बहुत छोटा है तो इस संबंध में डिटेल में बातचीत करने से बचें। हां, आप अपने बच्चे को यह भी बताएं कि कोविड 19 के संबंध में अपने दोस्तों से कम बातचीत करें ताकि वे आपस में गलत सूचनाओं का आदान-प्रदान न कर सकें। लेकिन अपने समझदार बच्चे को कोरोना के लक्षण और इससे बचाव के बारे में जरूर बताएं।

बच्चे को सुनें

माना कि आप अपने बच्चे से ज्यादा जानते और समझते हैं। लेकिन बच्चे के मन में क्या चल रहा है, यह जानना भी आपकी जिम्मेदारी है। इसलिए बच्चों की हर बात को ध्यान से सुनें। फिर चाहे वह कोरोनावायरस से संबंधित हो या नहीं।

वैसे भी इस लाॅकडाउन में बच्चों के जहन में ज्यादातर बातें इस समस्या से जुड़ी हुई हैं। उन्हें इन दिनों क्या पसंद आ रहा है और क्या नहीं, यह भी जानने की कोशिश। बच्चों के हाव-भाव से यह भी समझने का प्रयास करें कि कहीं उनके मन में किसी तरह का डर तो घर नहीं कर गया है।

कहने की बात ये है कि जब घर में बच्चे होते हैं तो पैरेंट्स की जिम्मेदारी अन्य लोगों से ज्यादा होती है। चूंकि इन दिनों कोरोनावायरस के चलते लाॅकडाउन है इस स्थिति से कैसे निपटना है, बच्चे को यह भी बताएं। उन्हें ध्यान से सुनें और दोस्ताना व्यवहार के साथ उन्हें मौजूदा सिचुएशन को समझाएं।

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