मां का दूध (Breastmilk ) हर शिशु (infant) के लिए अमृत है। खासकर मां का पहला दूध (colostrum), बच्चे की इम्युन को मजबूत (build baby’s immune system) करता है और बीमारियों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है। इसके अलावा मां का दूध शिशु को मां के और करीब ले जाता है।
लेकिन ब्रेस्टफीडिंग (breastfeeding) के साथ एक महिला के हजारों सवाल जुड़े होते हैं। जैसे शिशु को जन्म के कितनी देर बाद दूध पिलाना चाहिए? कितने सालों तक बच्चे के लिए मां का दूध सुरक्षित होता है? क्या ब्रेस्टफीडिंग (breastfeeding) से मां के स्वास्थ्य पर इसका (does it effects mother’s health) असर पड़ता है? मां के दूध से बच्चे को कितने फायदे (benefits) मिलते हैं?
आज हम कुछ ऐसे ही सवालों के जवाब देंगे। ये न सिर्फ अहम हैं बल्कि होने वाली मांओं के लिए काफी जरूरी भी हैं।
ब्रेस्टफीडिंग के शिशु के लिए फायदे (benefits of breastfeeding for infants)
एक मां भले ही अपने शिशु को बहुत कम समय के लिए ब्रेस्टफीडिंग (breastfeeding) करवाए, तब भी वह फायदेमंद होता है। खासकर जन्म के कुछ दिनों तक नई मां को ब्रेस्डफीडिंग (breastfeeding) अवश्य करवानी चाहिए। मां के शुरुआती दूध में कोलोस्ट्रम (colostrum) होता है। इसमें सभी जरूरी तत्व (rich substance) मौजूद होते हैं। ये तत्व शिशु के इम्यून को मजबूत बनाता है।
ऐसे हजारों अध्ययन हो चुके हैं, जिनसे पता चलता है कि जो शिशु जन्म के छह माह तक सिर्फ मां का दूध पीते हैं, वे उन शिशु की तुलना में इस समयावधि में कम बीमार पड़ते हैं, जिन्हें मां का दूध नहीं मिला होता है। मां का दूध पीने वाले शिशु कई घातक बीमारियों से भी बच जाते हैं। इसमें गैस्ट्रोएंटेराइटिस (gastroenteritis), श्वसन संबंधी बीमारियां (respiratory illnesses) आदि मौजूद हैं।
ब्रेस्ट फीडिंग के मां के लिए फायदे (benefits of breastfeeding for moms)
कई नई मां इस बात से परेशान (tensed) रहती हैं कि ब्रेस्टफीडिंग (breastfeeding) करवाने से कहीं उनका स्वास्थ्य (health) तो प्रभावित नहीं होगा? आपको बता दें कि ब्रेस्टफीडिंग (breastfeeding) करवाने की वजह से कई तरह की बीमारियों (health diseases) से बचे रहा जा सकता है। इसके अलावा ब्रेस्टफीडिंग से मां (mom) खुद को भावनात्मक रूप से मजबूत (emotionally strong) महसूस करती हैं।
स्वास्थ्य के फायदों (health benefits) की बात करें तो जो मांएं जन्म के तुरंत बाद अपने शिशु को दूध पिलाती हैं, उनमें ऑक्सिटॉसिन नाम का हार्मोन रिलीज होता है। यह हार्मोन गर्भाश्य को सामान्य बनाने में मदद करता है और पोस्टपार्टम ब्लीडिंग (postpartum bleeding) में भी कमी आती है।
कुछ अध्ययनों से यह भी पता चला है कि जो महिलाएं नियमित अपने शिशु को दूध पिलाती हैं, भविष्य में उनमें ओवरियन और ब्रेस्ट कैंसर (ovarian and breast cancer) की आशंकाएं भी काफी कम हो जाती हैं।
इतना ही नहीं ब्रेस्टफीडिंग (breastfeeding) की वजह से टाइप 2 डायबिटीज (type 2 diabetes), हृयूमेटाइड अर्थराइटिस (rheumatoid arthritis), कार्डियोवस्कूलर (cardiovascular), बीपी (BP) और हाईकोलेस्ट्रोल (high cholesterol) जैसी समस्याएं होने की आशंका में भी कमी आती है।
ब्रेस्टफीडिंग कब रोकें (when to stop breastfeeding)
ब्रेस्टफीडिंग (breastfeeding) रोकने का कोई निश्चित समय नहीं है। यह महिला की अपनी इच्छा होती है कि उन्हें कब ब्रेस्टफीडिंग रोकनी है। हालांकि कुछ मांएं ऐसी हैं, जिन्हें अपने करियर (career), अपनी कामकाज के कारण अचानक ही ब्रेस्टफीडिंग (breastfeeding) रोकनी पड़ती है। इस वजह से वे भावनात्मक रूप से टूटन भी महसूस करती हैं। खासकर यदि शिशु के जन्म के कुछ माह के भीतर ऐसा करना पड़े, तो मां के और शिशु दोनों के लिए यह बड़ी चुनौती (challenge) बन जाती है।
कुछ बच्चे तो ऐसे होते हैं, जो मां के दूध के बिना रह ही नहीं पाते। कुछ भी अन्य आहार खिलाने की कोशिश करने से बच्चे की तबियत बिगड़ सकती है।
यदि ब्रेस्टफीडिंग (breastfeeding) रोकना काफी मुश्किल हो रहा है, तो आप एक बार विशेषज्ञ की राय ले सकते हैं।

