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टाइप 2 डायबिटीज के रिस्क फैक्टर | Risk factors of Type 2 diabetes

टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 diabetes) यानी टाइप 2 मधुमेह होने की कोई एक वजह नहीं होती है। इसे आप अंग्रेजी में मल्टी फैक्टोरियल डिजीज (multifactorial disease) के रूप में जानते हैं। इसका मतलब है कि सिर्फ चीनी या मीठा (sugar) खाना बंद कर देने से या फिर नियमित एक्सरसाइज (regular exercise) करने से और स्वास्थ्य को बेहतर करने से आप इस बीमारी से छुटकारा नहीं पा सकते।

टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 diabetes) एक गंभीर बीमारी है। सामान्य रूप में हम यही जानते हैं कि यह जीवनशैली से जन्मी बीमारी है। इसे आप नियंत्रित तो कर सकते हैं, लेकिन इससे पूरी तरह मुक्ति मिलना संभव नहीं है। जैसे ही आपने अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया, वैसे ही आपका डायबिटीज (diabetes) का स्तर बिगड़ जाएगा। 

यही वजह है कि आज हम आपको टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 diabetes) से जुड़े गंभीर रिस्क (Risk factors) के बारे में बताने जा रहे हैं। आपके लिए जो उपयुक्त हो, वही करें और बेहतर जिंदगी जीएं।

मोटापा (Obesity)

बढ़ता वजन (overweight) कई तरह की बीमारियों का जड़ है। इसी तरह टाइप 2 डायबिटीज के रिस्क को भी यह काफी बढ़ा देता है। नेशनल हार्ट, लंग और ब्लड इंस्टीट्यूट (National Heart, Lung, and Blood Institute)  के अनुसार बॉडी मास इंडेक्स यह निर्धारित करता है कि आप मोटे हैं या आपका वजन अधिक है।

खाने की बुरी आदतें (Poor Eating Habits)

अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन (The American Diabetes Association) के अनुसार गलत तरह के आहार का बहुत ज्यादा सेवन करने से टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 diabetes) का रिस्क बढ़ जाता है। कई अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि कैलोरी युक्त डाइट (high in calorie-dense), प्रोसेस्ड फूड (processed foods) और विभिन्न तरह के बेकार पेय (beverages), आपके टाइप 2 मधुमेह का रिस्क बढ़ा देता है। 

जिस तरह के आहार से आपको दूर रहना चाहिए वे हैं, सफेद ब्रेड (white bread), चिप्स (chips), कूकीज़ (cookies), केक (cake), सोडा (soda), फ्रूट जूस (fruit juice)। टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 diabetes) के रिस्क को कम करना है तो फल (fruits), सब्जियां (vegetables), साबुत अनाज (whole grain), पानी और चाय (water and tea) का सेवन करें।

टीवी देखना (Too much TV time)

तमाम विशेषज्ञों का कहना है जो लोग बहुत ज्यादा टीवी (TV) देखते हैं, उन्हें कई तरह की बीमारियों का रिस्क रहता है। इसकी वजह है शारीरिक रूप से सक्रिय न होना। बैठकर घंटों टीवी देखने से मोटापा भी बढ़ता है। इससे टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 diabetes) के रिस्क में इजाफा भी होता है।

सोने की आदतें (Sleeping Habits)

नेशनल स्लीप फाउंडेशन (The National Sleep Foundation) के अनुसार अगर आप सही तरह से नहीं सोते हैं, तो यह आदत आप पर काफी भारी पड़ सकती है। यह आपके शरीर के इनसुलिन (Insulin) और ब्लड शुगर (blood sugar) के बैलेंस को प्रभावित करती है। समय गुजरने के साथ-साथ यह टाइप 2 डायबिटीज में बदल जाता है।

पीसीओएस (Polycystic Ovarian Syndrome)

पीसीओएस  (PCOS) एक हार्मोन असंतुलन बीमारी है। जिन महिलाओं को पॉलीसिस्टिक ओवरियन सिंड्रोम (Polycystic Ovarian Syndrome) यानी पीसीओएस है, उन्हें टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 diabetes) का रिस्क काफी ज्यादा होता है। यदि किसी महिला या लड़की के पारिवारिक इतिहास में इस तरह की बीमारी है, तो उन्हें भी टाइप 2 डायबिटीज का रिस्क काफी ज्यादा होता है। यह अध्ययन 2017 अगस्त में जरनल आफ क्लीनिकल एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म (journal of Clinical Endocrinology & Metabolism) में प्रकाशित हुआ है। इंसुलिन प्रतिरोध और मोटापा इन स्वास्थ्य स्थितियों के सामान्य कारण हैं।

एडीए (The American Diabetes Association) के अनुसार 45 साल से जिनकी आयु ज्यादा है, उन्हें भी टाइप 2 डायबिटीज का रिस्क काफी ज्यादा होता है।  हालांकि हाल के सालों में बच्चों और किशोरों (kids and teens) में भी प्रीडायबिटीज (prediabetes) और टाइप 2 डायबिटीज देखने को मिले हैं। इन्हें इस बीमारी के साथ डायग्नोज किया गया है।

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