बतौर पर मां-बाप (parents) हम यह कभी नहीं चाहते हैं कि बच्चे को किसी तरह की मानसिक स्वास्थ्य (mental health) से जुड़ी समस्या (problem) हो। हम यह नहीं चाहते हैं कि हमारे बच्चे (children) पर किसी भी तरह की मुश्किलें आएं। लेकिन जिंदगी (life) कब, किसके साथ क्या करेगी, यह कोई नहीं जानता है। शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर तो हर माता-पिता काफी सजग (conscious) रहते हैं। जैसे ही बात मानसिक स्वास्थ्य (mental health) की आती है, हम इस संबंध में सोचते भी नहीं हैं। जबकि इस ओर ज्यादा ध्यान दिए जाने की दरकार है।
दरअसल यदि किसी बच्चे को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कोई समस्या होगी, तो पैरेंट्स (parents) अव्वल तो उसे लंबे समय तक समझ नहीं पाते हैं और जब तक जान लेते हैं, वे इसका इलाज (treatment) बहुत देरी से कराते हैं। आज हम यहां बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के बारे में ही बातचीत करेंगे।
पैरेंट्स के लिए (For parents)
हर बच्चा (children) अलग होता है। अगर आप अपने बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंतित (tensed) हैं, तो उनमें हो रहे मानसिक और भावनात्मक (mental and emotional changes) बदलाव की ओर गौर करें। ध्यान दें कि क्या उसकी प्रतिक्रिया (response) करने का अंदाज पहले से बदल गया है। खुद से पूछें कि क्या वह पहले की तरह घर में पेश आ रहा है? क्या उसके दोस्तों (friends) के साथ भी रिश्ते बदले हैं? बच्चों के अंदर हो रहे निम्न बदलावों पर गौर करें।
सोच में बदलाव (Change in thinking)
हर समय बच्चा नकारात्मक (negative) बातें करता है। हर गलत चीज के लिए वह खुद को जिम्मेदार (responsible) मानता है। बार-बार उसके दिमाग में बुरे-बुरे ख्याल (bad thoughts) आते हैं। उसकी एकाग्र क्षमता (concentration) भी प्रभावित हुई है। इतना ही नहीं उसकी पढ़ाई भी पहले से ज्यादा प्रभावित हुई है। उसका किसी चीज में मन नहीं लगता।
भावनात्मक बदलाव (emotional changes)
बात छोटी सी होती है, लेकिन बच्चा उसे बहुत बड़ा करके बयां करता है। हर समय वह अपराध बोध (guilt) में रहता है। वह दूसरों पर बेवजह गुस्सा (angry on others) रहता है। कौन सी बात उसे चुभ (hurt) गई है, यह उसे भी पता नहीं होता। लेकिन हमेशा उदासी (sad) में रहता है। खुश (happy) रहना मानो भूल गया है। हर समय खुद को हेल्पलेस (helpless) महसूस करता है। बातचीत में कभी भी सकारात्मक (positive) शब्दों का प्रयोग नहीं करता है। वह इस भावना से भर गया है कि लोगों ने उसे अस्वीकार (Reject) कर दिया है। उसे कोई पसंद (like) नहीं करता है। इसलिए उसकी मौजूदगी बेबुनियाद (baseless) है। बच्चा यह तक सोचने लगता है कि उसका होने या न होने से किसी को फर्क नहीं पड़ता है।
व्यवहार में बदलाव (changes in behaviour)
बच्चा हर समय अकेला रहना चाहता है। छोटी-छोटी बात पर वह रो देता है। किसी भी तरह की इंज्वाॅयमेंट (enjoyment) वाली एक्टिविटी (activity) से दूर रहता है। खेल-कूद से दूर रहता है। अचानक कोई घटना घट जाए तो वह बौखला (Go down) जाता है और हमेशा छोटी बात को बखेड़ा खड़ा कर देता है। हमेशा एनर्जी की कमी (low energy) महसूस करता है।
इतना ही नहीं बच्चा रात को सोने में दिक्कत (lack of sleep) महसूस करता है। दोस्तों के साथ भी उसके रिश्ते बिगड़ने लगते हैं और उसका व्यवहार पहले की तुलना में काफी अपरिपक्व नजर आने लगता है।
शारीरिक बदलाव (physical changes)
बच्चा हमेशा सिरदर्द (headache), पेट दर्द (bloating and stomach pain), शरीर में दर्द (body ache) की शिकायत करता रहता है। हमेशा थका (tired) हुआ महसूस करता है। नींद उसे बहुत कम आती है। कभी कभी बहुत ज्यादा उत्साहित (excited) हो जाता है। कभी-कभी उसकी एक्टिविटी (activity) से नर्वसनेस झलकती है जैसे नाखून चबाता (nail biting) है, बालों को गोल-गोल घुमाना, अंगूठा चूसना (thumb sucking) आदि।
नोट: यहां बताई गई बातें यदि आपको अपने बच्चे में दिखे इसका मतलब यह नहीं है कि बच्चे का स्वास्थ्य सही नहीं है। यदि आपको बच्चों में ऐसे लक्षण नजर आ रहे हैं तो बेहतर है कि बच्चों को डाॅक्टर के पास लेकर जाएं। वही आपको सही सलाह दे सकते हैं।

