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एंग्जायटी डिसऑर्डर: अपनी हेल्प कैसे करें | Anxiety Disorder : Self-Care Tips

एंग्जायटी डिसऑर्डर (Anxiety disorder) यानी चिंता विकार। यह भी स्ट्रेस (stress) और डिप्रेशन (depression) की ही तरह एक मेंटल डिसऑर्डर (mental disorder) है। 2017 में हुए एक अध्ययन (study) के रिपोर्ट (report) में कहा गया है कि भारत में लगभग 197 मिलियन लोग एंग्जायटी (Anxiety) से पीड़ित हैं। यह कुल आबादी (population) का लगभग 14.3 प्रतिशत है। 

इसी आंकड़ें से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि कितने ज्यादा लोग एंग्जायटी (Anxiety) से परेशान है। इसलिए हम सबकी जिम्मेदारी बनती है कि न सिर्फ अपने फिजीकल हेल्थ (physical health) की ओर ध्यान दें बल्कि मेंटल हेल्थ (mental health) को भी दुरुस्त बनाएं।

लेकिन इसकी सबसे बड़ी परेशानी (problem) ये होती है कि एंग्जायटी (Anxiety) या कोई अन्य मेंटल डिसऑर्डर (mental disorder) होने पर कोई भी व्यक्ति प्रोफेशनल की मदद (professional help) लेने से बचता है।

असल में इसके पीछे वजह है मेंटल डिसऑर्डर (mental disorder) का टैबू (taboo) होना।

अगर आप खुद से जरा भी प्यार (love) करते हैं और एंग्जायटी (Anxiety) जैसी प्राॅब्लम से बचना चाहते हैं, तो यहां दिए गए कुछ टिप्स (tips) को फाॅलो (follow) करें। तभी आप खुद को एंग्जायटी (Anxiety) से बचा सकते हैं।

रिलैक्सेशन ट्रेनिंग करें (relaxation training)

एंग्जायटी (Anxiety) होने पर खुद को कंट्रोल (control) करना मुश्किल लगने लगता है। लेकिन इस स्थिति में अगर आपने खुद को समय रहते नियंत्रित (control) नहीं किया तो स्थिति (condition) बिगड़ सकती है। शायद तब आप खुद को संभाल भी न पाएं।

एंग्जायटी (Anxiety) कंट्रोल (control) करने के लिए रिलैक्सेशन ट्रेनिंग (relaxation training) कर सकते हैं। इसमें आपको अपने शरीर की मांसपेशियों (muscles) को रिलैक्स (relax) करना है। अपने पैर की उंगलियों से शुरू कर सकते हैं। शरीर को भी ढीला छोड़ दें और किसी तरह भी नेगेटिव सोच (negative thinking) को खुद पर हावी न होने दें।

एक्सरसाइज करें (Regular exercise)

रोजाना तकरीबन 30 मिनट के लिए नियमित एक्सरसाइज (Regular exercise) करें। एक्सरसाइज (exercise) में वाॅकिंग (walking), जाॅगिंग (jogging) या लिफ्टिंग वेट्स (lifting weights) कर सकते हैं। इनकी मदद से एंग्जायटी (Anxiety) के कुछ लक्षणों (symptoms) में राहत मिल सकती है। इतना ही नियमित एक्सरसाइज (Regular exercise) के कारण एंग्जायटी (Anxiety) होने से पहले ही इसे रोका जा सकता है।

मेडिटेशन करें (meditation)

अपने दिमाग को शांत (calm) रखना आसान (easy) नहीं है। इसे सीखना (learn) पड़ता है। मेडिटेशन (meditation) के जरिए इसे किया जा सकता है। यही नहीं मेडिटेशन (meditation) में एंग्जायटी (Anxiety) को कंट्रोल (control) करने की क्षमता है।

मेडिटेशन करते हुए आपको अपने सांस की गति और शरीर के सभी सेंसेशन पर ध्यान (Focusing on your breath and body sensations) रखना होता है। इसके साथ अपने आपके प्रति नाॅन-जजमेंटल होना चाहिए। कोई भी गलत विचार आपके मस्तिष्क में नहीं जाने चाहिए। इसी तरह मेडिटेशन आपको एंग्जायटी कम करने में मदद कर सकता है।

बातचीत करें (talk to friends) 

एंग्जायटी (anxiety) महसूस होने पर किसी अपने से बातचीत (talk to friends) करें। बिल्कुल चुप (do not stay quiet) न रहें। मन में जो भी चल रहा है, जैसा भी चल रहा है, सही या गलत। इसकी परवाह किए बिना अपने मन की हर बात को अपने फ्रेंड, रिलेटिव से शेयर (share with your relatives and friends) करें।

एंग्जायटी (anxiety) महसूस करने में पर सबसे ज्यादा हेल्पफुल यही विकल्प होता है कि आप किसी के साथ अपने दिल की बात शेयर कर रहे हैं।

एंग्जायटी डिसऑर्डर (Anxiety disorder) को एक सामान्य बीमारी की तरह लें। खुद को खुश नसीब समझें कि आपको एंग्जायटी है और आप इस बात को समझ पा रहे हैं। ऐसे में एंग्जायटी से डील (to deal with anxiety) करना आसान (becomes easy) हो जाता है। आप न सिर्फ अपनी बल्कि अपने परिवार को भी सपोर्ट (support your family) कर सकते हैं।

ध्यान रखें कि मेंटल हेल्थ (mental health) का मतलब सिर्फ इतना नहीं है कि आप अपनी बीमारी को जानें, साथ ही अपने दोस्तों और अन्य जानकारों को भी इस संबंध में जागरूक बनाएं।

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